कुरान - 53:52 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
وَقَوۡمَ نُوحٖ مِّن قَبۡلُۖ إِنَّهُمۡ كَانُواْ هُمۡ أَظۡلَمَ وَأَطۡغَىٰ

Transliteration: (Wa qawma Noohim min qablu innahum kaanoo hum azlama wa atghaa)

और उनसे पहले नूह की क़ौम को [62], बेशक वे बड़े ही ज़ालिम और निहायत सरकश लोग थे [63]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 52

"और उनसे पहले नूह की क़ौम को [62], बेशक वे बड़े ही ज़ालिम और निहायत सरकश लोग थे [63]!"


[62] क़ौम-ए-नूह (अलैहिस्सलाम) का ग़र्क़ होना

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि आद और समूद से पहले हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की मुनकिर क़ौम को पानी के अज़ीम तूफ़ान में ग़र्क़ कर दिया गया।

[63] नौ सौ पचास साल का ज़ुल्म व सरकशी

क़ौम-ए-नूह ने साढ़े नौ सौ साल तक हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) को सताया, मारा-पीटा और बार-बार बे-होश छोड़ा (तफ़सीर रूह-उल-मआनी)। उनकी सरकशी हद से बढ़ चुकी थी।

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