Transliteration: (Wa qawma Noohim min qablu innahum kaanoo hum azlama wa atghaa)
"और उनसे पहले नूह की क़ौम को [62], बेशक वे बड़े ही ज़ालिम और निहायत सरकश लोग थे [63]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि आद और समूद से पहले हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की मुनकिर क़ौम को पानी के अज़ीम तूफ़ान में ग़र्क़ कर दिया गया।
क़ौम-ए-नूह ने साढ़े नौ सौ साल तक हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) को सताया, मारा-पीटा और बार-बार बे-होश छोड़ा (तफ़सीर रूह-उल-मआनी)। उनकी सरकशी हद से बढ़ चुकी थी।
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