कुरान - 4:131 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

131
وَلِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۗ وَلَقَدۡ وَصَّيۡنَا ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلِكُمۡ وَإِيَّاكُمۡ أَنِ ٱتَّقُواْ ٱللَّهَۚ وَإِن تَكۡفُرُواْ فَإِنَّ لِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۚ وَكَانَ ٱللَّهُ غَنِيًّا حَمِيدٗا

Transliteration: (Wa lillaahi maafis samaawaati wa maa fil ard; wa laqad wassainal lazeena ootul Kitaaba min qablikum wa iyyaakum anit taqul laah; wa intakfuroo fa inna lillaahi maa fis samaawaati wa maa fil ard; wa kaanal laahu Ghaniyyan hameedaa)

और अल्लाह ही का है जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है [395], और यक़ीनन हमने तुमसे पहले किताब दिए गए लोगों को और (अब) तुम्हें ताकीद की थी कि अल्लाह से डरते रहो [396]। और अगर तुम कुफ्र कर जाओ, तो (समझ लो कि) अल्लाह ही का है जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है [397], और अल्लाह बिल्कुल ही बे-नियाज़, सारी तारीफ़ों का मालिक है [398]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 131 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 131 की तफ़्सीर

 

✅ [395] सारी चीज़ों का मालिक सिर्फ अल्लाह है

आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ पर असली हक़ सिर्फ अल्लाह का है। मगर वह अपनी रहमत से जिनको चाहे वक़्ती तौर पर मालिकी देता है। इसलिए यह आयत किसी इंसानी मिल्कियत की नफ़ी नहीं करती, बल्कि बताती है कि असल हाकिम और मालिक सिर्फ अल्लाह है।

✅ [396] अल्लाह से डरने का हुक्म हर उम्मत के लिए है

तक़्वा यानी अल्लाह से डरना कोई नई बात नहीं, बल्कि यह हुक्म हर दौर में हर नबी की उम्मत को दिया गया। जैसे: रोज़ा, ए‘तिकाफ़ और निकाह — ये सब भी पहले से चले आ रहे शरीअत के हिस्से हैं।

✅ [397] इंसान का ईमान या कुफ्र अल्लाह को प्रभावित नहीं करता

अगर सब लोग भी काफ़िर हो जाएं, तब भी अल्लाह की शान में कोई कमी नहीं आती। हर चीज़ उसी की है, वह किसी की इबादत या आज़माइश का मोहताज नहीं। असल में हम उसकी ज़रूरतमंद हैं, और वह हर तरह से बे-नियाज़ है।

✅ [398] अल्लाह की बे-नियाज़ी और तारीफ़ें

हर ज़र्रा अल्लाह की तारीफ़ कर रहा है, और उसकी हक़ीक़ी मालिकी और इल्म का इज़हार करता है। जैसे क़ियामत का इल्म — जो सिर्फ अल्लाह को मालूम है। इस आयत में यक़ीन दिलाया गया कि हक़ीक़ी इख़्तियार और सिफ़तें सिर्फ अल्लाह के लिए हैं, चाहे इंसानों को कुछ वक़्ती इख़्तियार दिया गया हो।

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