Transliteration: (Wa lillaahi maafis samaawaati wa maa fil ard; wa laqad wassainal lazeena ootul Kitaaba min qablikum wa iyyaakum anit taqul laah; wa intakfuroo fa inna lillaahi maa fis samaawaati wa maa fil ard; wa kaanal laahu Ghaniyyan hameedaa)
आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ पर असली हक़ सिर्फ अल्लाह का है। मगर वह अपनी रहमत से जिनको चाहे वक़्ती तौर पर मालिकी देता है। इसलिए यह आयत किसी इंसानी मिल्कियत की नफ़ी नहीं करती, बल्कि बताती है कि असल हाकिम और मालिक सिर्फ अल्लाह है।
तक़्वा यानी अल्लाह से डरना कोई नई बात नहीं, बल्कि यह हुक्म हर दौर में हर नबी की उम्मत को दिया गया। जैसे: रोज़ा, ए‘तिकाफ़ और निकाह — ये सब भी पहले से चले आ रहे शरीअत के हिस्से हैं।
अगर सब लोग भी काफ़िर हो जाएं, तब भी अल्लाह की शान में कोई कमी नहीं आती। हर चीज़ उसी की है, वह किसी की इबादत या आज़माइश का मोहताज नहीं। असल में हम उसकी ज़रूरतमंद हैं, और वह हर तरह से बे-नियाज़ है।
हर ज़र्रा अल्लाह की तारीफ़ कर रहा है, और उसकी हक़ीक़ी मालिकी और इल्म का इज़हार करता है। जैसे क़ियामत का इल्म — जो सिर्फ अल्लाह को मालूम है। इस आयत में यक़ीन दिलाया गया कि हक़ीक़ी इख़्तियार और सिफ़तें सिर्फ अल्लाह के लिए हैं, चाहे इंसानों को कुछ वक़्ती इख़्तियार दिया गया हो।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat