कुरान - 4:161 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

161
وَأَخۡذِهِمُ ٱلرِّبَوٰاْ وَقَدۡ نُهُواْ عَنۡهُ وَأَكۡلِهِمۡ أَمۡوَٰلَ ٱلنَّاسِ بِٱلۡبَٰطِلِۚ وَأَعۡتَدۡنَا لِلۡكَٰفِرِينَ مِنۡهُمۡ عَذَابًا أَلِيمٗا

Transliteration: (Wa akhzihimur ribaa wa qad nuhoo 'anhu wa aklihim amwaalan naasi bilbaatil; wa a'tadnaa lilkaafireena minhum 'azaaban aleema)

और उनके सूद लेने के कारण, जबकि उन्हें इससे मना किया गया था, और लोगों का माल नाहक़ तरीक़े से खाने के कारण [460]। और हमने इनकार करने वालों के लिए एक दुखदायी सज़ा तैयार कर रखी है [461]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 161 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 161 की तफ़्सीर

 

✅ [460] सूद लेना और नाजायज़ तरीक़े से माल खाना

इस आयत में यहूदियों के दो बड़े गुनाहों की निशानदेही की गई है:

  • सूद (ब्याज) लेना – जबकि उनकी अपनी शरीअत में यह साफ़ तौर पर हराम था, इसके बावजूद उन्होंने खुल्लम-खुल्ला इसे अपनाया।
    यह गुनाह इसलिए अलग से ज़िक्र किया गया क्योंकि यह न सिर्फ़ घोर अन्याय है बल्कि समाज को विनाश की ओर ले जाता है।
  • लोगों का माल नाहक़ तरीक़े से खाना – इसमें घूस, चोरी, जुए, फोहश आमदनी (जैसे गाना-बजाना) आदि सारे हराम ज़रिए शामिल हैं, जो उस वक़्त की शरीअत में भी सख़्ती से मना थे और इस्लाम में भी हराम हैं।

ऐसे सारे गुनाह 'ज़ुल्म' की श्रेणी में आते हैं, और अल्लाह के यहाँ इनकी सज़ा बहुत सख़्त है।

✅ [461] इनकार पर अडिग रहने वालों के लिए सज़ा

इस आयत में उन लोगों की बात हो रही है जो कुफ्र और नाफ़रमानी पर अड़े रहे।
ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने दुखदायी सज़ा तैयार कर रखी है।

लेकिन साथ ही यह भी समझना चाहिए कि
जो लोग तौबा कर लेते हैं और सच्चे दिल से ईमान लाते हैं,
उनके लिए अल्लाह की रहमत के दरवाज़े खुले रहते हैं — क्योंकि अल्लाह गुनाहों को माफ़ करने वाला है।

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