Transliteration: (Laakinir raasikhoona fil'ilmi minhum walmu'minoona yu'minoona bimaaa unzila ilaika wa maaa unzila min qablika walmuqeemeenas Salaata walmu'toonaz Zakaata walmu 'minoona billaahi wal yawmil Aakhir; ulaaa'ika sanu'teehim ajran 'azeemaa)
यहाँ "जो लोग ज्ञान में पक्के हैं" से मुराद वे लोग हैं जिनका इल्म दिलों में जड़ पकड़ चुका होता है, जैसे गहरी जड़ वाले पेड़।
ये वे उलमा और सच्चे ईमान वाले हैं, जो न केवल सही अक़ीदे रखते हैं बल्कि अपने इल्म पर अमल भी करते हैं।
हज़रत अब्दुल्लाह बिन सलाम (रज़ि.) और उनके जैसे अन्य साथी — जो पहले यहूदी आलिम थे, फिर मुसलमान बनकर हुज़ूर ﷺ के सहाबी बने — इसी श्रेणी में आते हैं।
वे न केवल कुरआन जैसी स्पष्ट वह़ी पर ईमान लाते हैं, बल्कि हदीस जैसी सूक्ष्म वह़ियों पर भी पूरा यक़ीन रखते हैं।
सच्चा मोमिन वही है जो कुरआन और हदीस — दोनों को दिल से कुबूल करता है।
इस आयत में दो प्रकार के ईमान का ज़िक्र है:
दोनों का अलग-अलग ज़िक्र कुरआन की अफ़ज़ीलत और अंतिमता को स्पष्ट करता है।
जो उलमा अपने इल्म पर अमल भी करते हैं, उन्हें साधारण मोमिनों की तुलना में बड़ा इनाम मिलेगा, क्योंकि:
जबकि इसके उलट, जो आलिम अमल नहीं करते,
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat