कुरान - 4:47 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ ءَامِنُواْ بِمَا نَزَّلۡنَا مُصَدِّقٗا لِّمَا مَعَكُم مِّن قَبۡلِ أَن نَّطۡمِسَ وُجُوهٗا فَنَرُدَّهَا عَلَىٰٓ أَدۡبَارِهَآ أَوۡ نَلۡعَنَهُمۡ كَمَا لَعَنَّآ أَصۡحَٰبَ ٱلسَّبۡتِۚ وَكَانَ أَمۡرُ ٱللَّهِ مَفۡعُولًا

Transliteration: (Yaaa aiyuha lazeena ootul Kitaaba aaminoo bimaa nazzalnaa musadiqallimaa ma'akum min qabli an natmisa wujoohan fanaruddahaa 'alaaa adbaarihaaa aw nal'anahum kamaa la'annaaa Ashaabas Sabt; wa kaana amrul laahi maf'oolaa)

ऐ किताब वालों! उस (क़ुर्आन) पर ईमान लाओ जो हम (अल्लाह) ने नाज़िल फ़रमाया है, जो उस किताब की तस्दीक़ करता है जो तुम्हारे पास है [175], इससे पहले कि हम कुछ चेहरों को मिटा दें [176] और उन्हें उनकी पीठ की तरफ फेर दें [177], या उन पर लानत करें जैसे हमने शनिवार वालों पर लानत की थी [178]। और बेशक, अल्लाह का हुक्म पूरा होकर रहता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 47 की तफ़्सीर

 

✅ [175] क़ुर्आन पूर्ववर्ती किताबों की तस्दीक़ करता है

"उस किताब की तस्दीक़ करता है" का मतलब है कि क़ुर्आन पहले से मौजूद आसमानी किताबों की सच्चाइयों की पुष्टि करता है। यह उन किताबों में दर्ज भविष्यवाणियों की भी गवाही देता है, जिनमें क़ुर्आन और हज़रत मुहम्मद ﷺ की आमद का ज़िक्र है। इसके अलावा, अगर क़ुर्आन न आता, तो पहले की किताबें और नबियों का ज़िक्र बिल्कुल मिट चुका होता। आज सिर्फ वही आसमानी किताबें, सहीफ़े और नबी याद किए जाते हैं जिनका क़ुर्आन में ज़िक्र है — बाक़ी सब भुला दिए गए।

✅ [176] इन्कार पर अल्लाह की सज़ा

इस आयत में चेतावनी दी गई है कि अगर किताब वाले क़ुर्आन को नहीं मानेंगे, तो चेहरों को मिटा देना जैसी सख़्त सज़ाएं दी जा सकती हैं। हालांकि, हज़रत मुहम्मद ﷺ के आने के बाद पूरी क़ौम पर अज़ाब भेजने का सिलसिला बंद कर दिया गया, लेकिन इन्फ़रादी तौर पर अब भी ऐसी सज़ाएं हो सकती हैं।

✅ [177] चेहरे का पलटना – अल्लाह की लानत की एक मिसाल

"चेहरों को उनकी पीठ की तरफ फेर देना" का मतलब यह है:

  • चेहरे की पहचान मिटा देना, जैसे आंख, नाक, मुँह का ख़ात्मा।
  • चेहरा बिल्कुल समतल हो जाना, जैसे सिर के पिछले हिस्से की तरह।
    यह अल्लाह की तरफ से बेहद ज़लील करने वाली लानत की निशानी है, जो इंसान की इज्ज़त और पहचान दोनों को खत्म कर देती है।

✅ [178] हफ़्ते वालों की मिसाल

अल्लाह यहाँ बनी इस्राईल को याद दिलाता है कि जो लोग शनिवार के दिन (जिस दिन मछली पकड़ना हराम था) मछली पकड़ते थे, उन्हें बंदरों में तब्दील कर दिया गया। यह:

  • हक़ीक़ी जिस्मानी तब्दील थी।
  • और यह मिसाल बताती है कि अल्लाह का अज़ाब आज भी आ सकता है — या तो दुनिया में या आख़िरत में।

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