कुरान - 4:50 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
ٱنظُرۡ كَيۡفَ يَفۡتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَۖ وَكَفَىٰ بِهِۦٓ إِثۡمٗا مُّبِينًا

Transliteration: (Unzur kaifa yaftaroona 'alal laahil kazib, wakafaa biheee ismamm mubeenaa)

देखो! वे अल्लाह पर किस प्रकार झूठ गढ़ते हैं [183], और यही तो एक प्रत्यक्ष गुनाह है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 50 की तफ़्सीर

 

✅ [183] झूठी बड़ाई अल्लाह पर झूठ गढ़ना है

वे काफ़िर जो मोमिनों से बेहतर होने का दावा करते हैं, जबकि अल्लाह ने मोमिनों को इज़्ज़त वाला और काफ़िरों को रुसवा कहा है — ऐसा दावा अल्लाह पर झूठ गढ़ना कहलाता है।
परहेज़गारों की तौहीन करना, या अल्लाह द्वारा ज़लील लोगों को ऊंचा बताना, अल्लाह की हिकमत का इनकार है और खुला गुनाह है।

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