कुरान - 4:69 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

69
وَمَن يُطِعِ ٱللَّهَ وَٱلرَّسُولَ فَأُوْلَـٰٓئِكَ مَعَ ٱلَّذِينَ أَنۡعَمَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِم مِّنَ ٱلنَّبِيِّـۧنَ وَٱلصِّدِّيقِينَ وَٱلشُّهَدَآءِ وَٱلصَّـٰلِحِينَۚ وَحَسُنَ أُوْلَـٰٓئِكَ رَفِيقٗا

Transliteration: (Wa many-yuti'il laaha war Rasoola fa ulaaa'ika ma'al lazeena an'amal laahu 'alaihim minan nabiyyeena wassiddeeqeena washshuhadaaa'i wassaaliheen; wa hasuna ulaaa'ika rafeeqaa)

और जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करे, तो वे उन लोगों के साथ होंगे जिन पर अल्लाह ने इनाम फ़रमाया है—यानी अंबिया, सिद्दीक़ीन, शोहदा और सालेहीन; और ये क्या ही अच्छे साथी हैं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 69 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा - आयत 69

✅ मुनअम अलैहिम (नेअमत याफ़्ता हस्तियां)

अल्लाह और रसूल (सल्ल.) के सच्चे फ़रमांबरदारों को जन्नत में अंबिया, सिद्दीक़ीन, शोहदा और औलियाए किराम की रफ़ाक़त और हमनशीनी का आला मक़ाम हासिल होगा।

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