कुरान - 4:71 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

71
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ خُذُواْ حِذۡرَكُمۡ فَٱنفِرُواْ ثُبَاتٍ أَوِ ٱنفِرُواْ جَمِيعٗا

Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo khuzoo hizrakum fanfiroo subaatin awin firoo jamee'aa)

ऐ ईमान वालो! अपना बचाव करो, फिर टुकड़ियों में निकलो या सब मिलकर निकलो [231] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 71 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा – आयत 71 की तफ़्सीर

 

✅ [231] रणनीतिक तैयारी और अल्लाह पर भरोसा

इस आयत में ईमान वालों को हुक्म दिया गया है कि वे सावधान और चौकस रहें, खासकर जंग या टकराव के समय। मुसलमानों को हथियार साथ रखने, तैयारी बनाए रखने और दुश्मनों के अचानक हमले से बचने के लिए सतर्क रहने की ताकीद की गई है। हालात और रणनीति के मुताबिक, कभी छोटे-छोटे दलों में और कभी एकजुट होकर आगे बढ़ने की हिदायत दी गई है। इससे हमें सबक मिलता है कि हथियार और सुरक्षा के साधन अपने या सामूहिक बचाव के लिए रखना अल्लाह पर भरोसे (तवक्कुल) के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह अमली तवक्कुल है — यानी इंसान अपना फर्ज़ अदा करे और अंतिम भरोसा अल्लाह की मदद और मर्ज़ी पर रखे।

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