Transliteration: (Wa la'in asaabakum fadlum minal laahi la yaqoolanna ka al lam takum bainakum wa bainahoo mawaddatuny yaa laitanee kuntu ma'ahum fa afooza fawzan 'azeemaa)
यहां अल्लाह की ओर से अनुग्रह से मुराद दुश्मनों पर विजय और ग़नीमत का माल है। मुसलमानों का दृष्टिकोण यह है कि ऐसी कामयाबियां बहादुरी या युद्ध कौशल से नहीं, बल्कि अल्लाह तआला के अनुग्रह और इनाम से मिलती हैं। सच्चे ईमान वाले हर सफलता में अल्लाह की मदद को मानते हैं, जबकि मुनाफ़िक़ सिर्फ़ दुनियावी नतीजों पर ध्यान देते हैं।
मुनाफ़िक़, मुसलमानों की कामयाबी देखकर ही उनके साथ होने की इच्छा जताता है, यह कहते हुए कि काश! मैं भी उनके साथ होता, तो बड़ी कामयाबी पाता। यह रवैया दर्शाता है:
इससे हमें सबक मिलता है कि सिर्फ़ दुनियावी फ़ायदे के लिए मुसलमानों के साथ होने की इच्छा रखना, जबकि कठिन समय में अनुपस्थित रहना, मुनाफ़िक़त की अलामत है। सच्चे ईमान वालों को ईमान और दुनिया दोनों मामलों में उम्मत के साथ वफ़ादारी, कुर्बानी और सच्चाई के साथ खड़ा रहना चाहिए।
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