Transliteration: (Faqaatil fee sabeelil laahi laa tukallafu illa nafsaka wa harridil mu'mineen; 'asallaahu ai yakuffa ba'sallazeena kafaroo; wallaahu ashaddu ba'sanw wa ashaaddu tankeelaa)
"अल्लाह की राह में जंग" से मुराद है ग़ज़वा-ए-सग़ीर बद्र (छोटा बद्र), ख़ासकर अबू सुफ़यान के साथ तयशुदा मुक़ाबला, जिसका वादा उहुद के साल पहले ही हो गया था।
अगर बाकी लोग इसे भारी समझें, तो भी:
"ऐ मेरे महबूब ﷺ, आप अकेले भी निकलें, फ़तह आपकी ही होगी।"
वाक़ई यही हुआ — हज़रत ﷺ सिर्फ़ सत्तर सहाबा के साथ निकले, और काफ़िर डर के मारे मैदान में ही नहीं आए।
यह रसूल ﷺ की अलौकिक बहादुरी और अल्लाह की तरफ़ से मिलने वाली पक्की फ़तह का सबूत है।
इससे यह भी साबित होता है कि रसूल ﷺ को अकेले जंग की इजाज़त देना, और फिर फ़तह का वादा करना, उनके अद्वितीय शौर्य और अल्लाह की मदद का बयान है।
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