Transliteration: (Allaahu laaa ilaaha illaa huwa la yajma'annakum ilaa Yawmil Qiyaamati laa raiba feeh; wa man asdaqu min allaahi hadeesaa)
इससे मालूम होता है कि अल्लाह के बारे में झूठ का सोचना भी असंभव है, क्योंकि यह उसकी क़ामिल और अजली सिफ़त के ख़िलाफ़ है। पैग़म्बरों ﷺ के लिए भी झूठ असंभव है, लेकिन यह उनकी ज़ाती सिफ़त से नहीं बल्कि अल्लाह की तरफ़ से हिफ़ाज़त (मासूमियत) के कारण है। चूंकि अल्लाह की सत्यता हर मख़लूक़ से बढ़कर है, इसलिए उसका सच उसकी ज़ाती सिफ़त के साथ हमेशा के लिए बंधा हुआ है। इसीलिए अल्लाह का क़यामत के दिन का वादा बिल्कुल पक्का और यक़ीनी है।
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