कुरान - 55:14 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
خَلَقَ ٱلۡإِنسَٰنَ مِن صَلۡصَٰلٖ كَٱلۡفَخَّارِ

Transliteration: (Khalaqal insaana min salsaalin kalfakhkhaar)

उसने इंसान को ठीकरी की तरह खनकती हुई मिट्टी से बनाया [15]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 14

"उसने इंसान को ठीकरी की तरह खनकती हुई मिट्टी से बनाया [15]!"


[15] हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तख़्लीक़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यहाँ इंसान से मुराद हज़रत आदम अलैहिस्सलाम हैं। अल्लाह तआला ने ज़मीन के हर हिस्से से मुख़्तलिफ़ क़िस्मों की मिट्टी जमा करके उसका ख़मीर उठाया, जब वह सूख कर खनकती हुई ठीकरी की मानिंद हो गई तो उसमें अपनी रूह फूँकी और आदम को हयात बख़्शी।

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