कुरान - 55:13 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

Transliteration: (Fabi ayyi aalaaa'i Rabbikumaa tukazzibaan)

तो ऐ जिन्नों और इंसानों! तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे [14]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 13

"तो ऐ जिन्नों और इंसानों! तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे [14]?"


[14] जिन्न व इंसान दोनों से ख़िताब

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इस आयत में इंसान और जिन्न दोनों को मुख़ातब किया गया है। चूंकि दोनों मुकल्लफ़ हैं (जिन्हें शरई अहकाम दिए गए हैं) और ज़मीन व आसमान की नेमतों से फ़ायदा उठाते हैं, लिहाज़ा दोनों को अपनी नाफ़रमानी छोड़कर अल्लाह की नेमतों का शुक्रगुज़ार होना चाहिए।

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