Transliteration: (Fabi ayyi aalaaa'i Rabbikumaa tukazzibaan)
"तो ऐ जिन्नों और इंसानों! तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे [14]?"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इस आयत में इंसान और जिन्न दोनों को मुख़ातब किया गया है। चूंकि दोनों मुकल्लफ़ हैं (जिन्हें शरई अहकाम दिए गए हैं) और ज़मीन व आसमान की नेमतों से फ़ायदा उठाते हैं, लिहाज़ा दोनों को अपनी नाफ़रमानी छोड़कर अल्लाह की नेमतों का शुक्रगुज़ार होना चाहिए।
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