कुरान - 55:1 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
ٱلرَّحۡمَٰنُ

Transliteration: (Ar Rahmaan)

बड़ा मेहरबान (रहमान) [1]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 1

"बड़ा मेहरबान (रहमान) [1]!"


शान-ए-नुज़ूल

जब क़ुरआन मजीद की मुक़द्दस आयत "उस्जुदू लिर-रहमान" (रहमान को सज्दा करो) नाज़िल हुई, तो मक्का के मुशरिकीन और काफ़िरों ने कहा: "हम रहमान को नहीं जानते, रहमान कौन है?" इसके जवाब में अल्लाह तआला ने यह सूरह नाज़िल फ़रमाई कि रहमान वह ज़ात है जिसने अपने महबूब नबी ﷺ को क़ुरआन की अज़ीम तालीम अता फ़रमाई।


[1] अल्लाह तआला का अपने महबूब ﷺ पर अज़ीम इल्म का फ़ज़्ल

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • उस्ताद-ए-हक़ीक़ी: अल्लाह तआला ने अपनी ख़ास रहमत व शफ़क़त से अपने हबीब मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ को बेमिसाल इल्म अता फ़रमाया। जैसे एक शफ़ीक़ उस्ताद अपने प्यारे शागिर्द को तमाम उलूम सिखा देता है, वैसे ही रहमान ने अपने महबूब को तमाम उलूम सिखाए।
  • तमाम मख़लूक़ से अफ़ज़ल इल्म: तमाम नबियों को ख़ास-ख़ास उलूम मिले—हज़रत आदम को अस्मा का इल्म, हज़रत सुलेमान को परिंदों की बोली, हज़रत दाऊद को ज़िरह बनाने का इल्म, हज़रत ख़िज़्र को इल्म-ए-लदुन्नी, हज़रत नूह को कश्ती बनाने का हुनर—लेकिन हुज़ूर सय्यिदे आलम ﷺ को मुकम्मल क़ुरआन अता हुआ जिसमें लौह-ए-महफ़ूज़ के तमाम उलूम मौजूद हैं।
  • सय्यिदे आलम ﷺ किसी मख़लूक़ के शागिर्द नहीं: हुज़ूर ﷺ का उस्ताद ख़ुद रब्बुल इज़्ज़त है, शागिर्द मुस्तफ़ा ﷺ हैं, और किताब क़ुरआन मजीद है। हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम हुज़ूर के उस्ताद नहीं बल्कि पैग़ाम लाने वाले ख़ादिम हैं।

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