कुरान - 55:4 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
عَلَّمَهُ ٱلۡبَيَانَ

Transliteration: ('Allamahul bayaan)

उन्हें मा कान व मा यकून (जो कुछ हो चुका और जो कुछ होने वाला है) का बयान सिखाया [3]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 4

"उन्हें मा कान व मा यकून (जो कुछ हो चुका और जो कुछ होने वाला है) का बयान सिखाया [3]!"


[3] इल्म-ए-मा कान व मा यकून और बयान की तालीम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • 'बयान' का हक़ीक़ी मफ़हूम: यहाँ 'बयान' से मुराद सिर्फ़ आम गुफ़्तगू नहीं, बल्कि 'इल्मु मा का-न व मा यकून' (अज़ल से अबद तक जो कुछ हो चुका और क़यामत तक जो कुछ होने वाला है) का मुकम्मल इल्म और उसका रौशन इज़हार है।
  • इल्म-ए-ग़ैब-ए-अताई: अल्लाह तआला ने अपने हबीब ﷺ को आसमानों व ज़मीनों, अर्श व फ़र्श, जन्नत व दोज़ख़ और तमाम मख़लूक़ात के अहवाल का ऐसा बसीर इल्म बख़्शा कि आप ﷺ ने उम्मत को हर आने वाले वाक़िए और फ़ित्ने से बाख़बर फ़रमा दिया।

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