Transliteration: (Ashshamsu walqamaru bihusbaan)
"सूरज और चाँद एक मुक़र्ररा हिसाब से चल रहे हैं [4]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने सूरज और चाँद की गर्दिश को इंतिहाई बारीक और मुक़र्ररा हिसाब पर रखा है। इसी मुंतज़म चाल से शम्सी व क़मरी साल, महीने, दिन, रात, मौसम और इबादतों के औक़ात (नमाज़, रोज़ा, हज) मुअय्यन होते हैं, जो इंसानी ज़िन्दगी के लिए अज़ीम नेमत है।
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