कुरान - 55:3 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
خَلَقَ ٱلۡإِنسَٰنَ

Transliteration: (Khalaqal insaan)

उसी ने इंसान (जान-ए-इंसानियत हुज़ूर मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ) को पैदा फ़रमाया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 3

"उसी ने इंसान (जान-ए-इंसानियत हुज़ूर मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ) को पैदा फ़रमाया।"


जान-ए-इंसानियत हुज़ूर ﷺ की तख़्लीक़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि तफ़सीर ख़ज़ाइन-उल-इरफ़ान और तफ़सीर-ए-नईमी में है कि यहाँ 'इंसान' से मुराद कामिल तरीन इंसान यानी हुज़ूर अकरम मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ हैं जो तमाम इंसानियत की जान और कायनात की असल हैं। अल्लाह तआला ने सबसे पहले अपने महबूब के नूर-ए-मुबारक़ को पैदा फ़रमाया और फिर उसी नूर के सदक़े में सारी कायनात को वजूद बख़्शा।

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