कुरान - 55:2 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
عَلَّمَ ٱلۡقُرۡءَانَ

Transliteration: ('Allamal Quran)

उसी ने अपने महबूब को क़ुरआन सिखाया [2]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 2

"उसी ने अपने महबूब को क़ुरआन सिखाया [2]!"


[2] क़ुरआन-ए-पाक की तालीम और महबूब ﷺ की अज़्मत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • तालीम-ए-क़ुरआन सबसे बड़ी नेमत: अल्लाह तआला ने अपनी नेमतों के बयान में सबसे पहले क़ुरआन की तालीम का ज़िक्र फ़रमाया, जिससे मालूम हुआ कि इल्म और क़ुरआन-ए-पाक तमाम कायनाती नेमतों से बढ़कर अफ़ज़ल तरीन नेमत है।
  • फ़साहत व बलाग़त का मुअज्जिज़ मक़ाम: क़ुरआन-ए-अज़ीम हिकमत, हिदायत और तमाम रूहानी व दुनियावी उलूम का सरचश्मा है जिसे अल्लाह ने अपने महबूब के सीना-ए-अक़्दस पर उतारा।

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