मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 2 तफ़सीर
मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)
सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 2
"उसी ने अपने महबूब को क़ुरआन सिखाया [2]!"
[2] क़ुरआन-ए-पाक की तालीम और महबूब ﷺ की अज़्मत
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
तालीम-ए-क़ुरआन सबसे बड़ी नेमत: अल्लाह तआला ने अपनी नेमतों के बयान में सबसे पहले क़ुरआन की तालीम का ज़िक्र फ़रमाया, जिससे मालूम हुआ कि इल्म और क़ुरआन-ए-पाक तमाम कायनाती नेमतों से बढ़कर अफ़ज़ल तरीन नेमत है।
फ़साहत व बलाग़त का मुअज्जिज़ मक़ाम: क़ुरआन-ए-अज़ीम हिकमत, हिदायत और तमाम रूहानी व दुनियावी उलूम का सरचश्मा है जिसे अल्लाह ने अपने महबूब के सीना-ए-अक़्दस पर उतारा।
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