Transliteration: (Wassamaaa'a rafa'ahaa wa wada'al Meezan)
"और उसने आसमान को बुलंद किया [6] और तराज़ू (अदल व इंसाफ़ का मेयार) क़ायम किया [7]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि आसमान ज़मीन से दर्जा और मक़ाम में बुलंद है। वहाँ फ़रिश्तों की रिहाइश है, नेमतों के नुज़ूल का मर्कज़ है और वहाँ कोई शिर्क या गुनाह नहीं। लेकिन बाज़ ऐतबार से ज़मीन को यह फ़ज़ीलत हासिल है कि यह अम्बिया-ए-किराम और बिलख़ुसूस सुल्तान-ए-दोआलम ﷺ का मुक़द्दस मस्कन है।
तराज़ू से मुराद दुनिया में लेन-देन का इंसाफ़ है ताकि कोई किसी पर ज़ुल्म न करे। सबसे पहले हज़रत नूह अलैहिस्सलाम के लिए तराज़ू नाज़िल हुआ। दूसरे मअनी में इससे मुराद आख़िरत का 'मीज़ान' है जिसमें नेक व बद आमाल तोले जाएँगे।
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