कुरान - 55:8 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
أَلَّا تَطۡغَوۡاْ فِي ٱلۡمِيزَانِ

Transliteration: (Allaa tatghaw fil meezaan)

ताकि तुम तोलने में हद से न बढ़ो [8]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 8

"ताकि तुम तोलने में हद से न बढ़ो [8]!"


[8] नाप-तोल में इंसाफ़ और अमानतदारी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि तिजारत और लेन-देन में हमेशा आख़िरत के मीज़ान को याद रखो। किसी का हक़ न मारो, बल्कि हर शख़्स को उसका पूरा-पूरा हक़ दो। थोड़ा ज़्यादा देना और थोड़ा कम लेना एहसान और भलाई का तरीक़ा है।

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