Transliteration: (Allaa tatghaw fil meezaan)
"ताकि तुम तोलने में हद से न बढ़ो [8]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि तिजारत और लेन-देन में हमेशा आख़िरत के मीज़ान को याद रखो। किसी का हक़ न मारो, बल्कि हर शख़्स को उसका पूरा-पूरा हक़ दो। थोड़ा ज़्यादा देना और थोड़ा कम लेना एहसान और भलाई का तरीक़ा है।
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