Transliteration: (Walhabbu zul 'asfi war Raihaan)
"और भूसे वाला अनाज [12] और ख़ुशबूदार फूल [13]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह ने अनाज को भूसे (ग़िलाफ़) में महफ़ूज़ फ़रमाया ताकि दाना ख़राब न हो। दाना इंसान खाता है और भूसा मवेशियों के चारे के काम आता है।
अल्लाह ने ख़ुशबूदार फूल और रिहान पैदा फ़रमाए जो रूह को राहत और तफ़रीह बख़्शते हैं। सूफ़िया-ए-किराम फ़रमाते हैं कि दाना जिस्मानी ग़िज़ा है और ख़ुशबू रूहानी ग़िज़ा की अलामत है।
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