कुरान - 55:27 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَيَبۡقَىٰ وَجۡهُ رَبِّكَ ذُو ٱلۡجَلَٰلِ وَٱلۡإِكۡرَامِ

Transliteration: (Wa yabqaa wajhu rabbika zul jalaali wal ikraam)

और बाक़ी रहेगा हमेशा [25] तुम्हारे रब की ज़ात-ए-अक़्दस, जो अज़्मत और बुज़ुर्गी वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 27

"और बाक़ी रहेगा हमेशा [25] तुम्हारे रब की ज़ात-ए-अक़्दस, जो अज़्मत और बुज़ुर्गी वाला है।"


[25] सिर्फ़ ज़ात व सिफ़ात-ए-इलाही की हमेशगी और बक़ा

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जब सूर फूँका जाएगा और सारी कायनात फ़ना हो जाएगी, तब सिर्फ़ वाहिद-ओ-यकता रब की ज़ात-ए-अक़्दस और उसकी सिफ़ात-ए-कामेला दायमी व बाक़ी रहेंगी। अल्लाह तआला की बक़ा ज़ाती है जबकि बाक़ी सब मख़लूक़ फ़ानी है।

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