कुरान - 55:26 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
كُلُّ مَنۡ عَلَيۡهَا فَانٖ

Transliteration: (Kullu man 'alaihaa faan)

ज़मीन पर जो कोई है, फ़ना होने वाला है [24]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 26

"ज़मीन पर जो कोई है, फ़ना होने वाला है [24]।"


[24] तमाम कायनात की फ़ना और मौत का यक़ीन

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि कायनात की हर जानदार मख़लूक़—इंसान, जिन्न, चौपाए, परिंदे—को मौत का ज़ायक़ा चखना है। दुनिया की कोई ताक़त, दौलत या हुकूमत हमेशा रहने वाली नहीं। यह आयत बंदे को दुनिया की बे-सबाती और आख़िरत की तय्यारी का पैग़ाम देती है।

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