कुरान - 55:24 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
وَلَهُ ٱلۡجَوَارِ ٱلۡمُنشَـَٔاتُ فِي ٱلۡبَحۡرِ كَٱلۡأَعۡلَٰمِ

Transliteration: (Wa lahul jawaaril mun sha'aatu fil bahri kal a'laam)

और उसी के हैं वे ऊँचे जहाज़ जो समुंदर में पहाड़ों की तरह उठे हुए चलते हैं [22] [23]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 24

"और उसी के हैं वे ऊँचे जहाज़ जो समुंदर में पहाड़ों की तरह उठे हुए चलते हैं [22] [23]।"


[22] कश्तियों और जहाज़ों की तख़्लीक़ व रवाइश

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि कश्तियों और अज़ीम-उल-शान पानी के जहाज़ों का लकड़ी व लोहे से बनना, उनका पानी पर तैरना, और इंसानों को यह अक़्ल व महारत अता होना कि वे हज़ारों टन वज़नी जहाज़ों को पहाड़ों की तरह समुंदर के सीने पर दौड़ाएँ—यह सब अल्लाह तआला ही की बख़्शी हुई ताक़त और क़ुदरत का करिश्मा है।

[23] जहाज़ की रूहानी तशबीह—तरीक़त, शरीअत और हिदायत

सूफ़िया-ए-किराम फ़रमाते हैं कि 'तरीक़त' एक गहरा समुंदर है, 'शरीअत' उस समुंदर में तैरने वाला जहाज़ है, 'मोमिन' उस जहाज़ का मुसाफ़िर है, और 'इलाही हिदायत व रहमत' वह मुआफ़िक़ हवा है जो इस जहाज़ को साहिल-ए-मुराद तक पहुँचाती है।

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