Transliteration: (Yakhruju minhumal lu 'lu u wal marjaan)
"उन दोनों में से निकलते हैं मोती और मूँगा [20]।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने खारे समुंदरों की गहराइयों में सीपों के अंदर क़ीमती मोती और मूँगे (मर्जानी जवाहरात) पैदा फ़रमाए जो इंसानों की ज़ीनत, तिजारत और दौलत का ज़रिया बनते हैं। जैसे मर्द व औरत के मिलने से औलाद जैसी नेमत वजूद में आती है, वैसे ही समुंदरों के संगम से यह क़ीमती ख़ज़ाने पैदा होते हैं।
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