मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 20 तफ़सीर
मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)
सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 20
"उनके दरम्यान एक आड़ (परदा) है जिससे वे आगे नहीं बढ़ सकते [19]!"
[19] क़ुदरती बरज़ख़ और रूहानी अस्ली हक़ीक़त
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
क़ुदरत का परदा: मीठे और नमकीन पानी के बीच कोई ज़ाहिरी दीवार नहीं, मगर अल्लाह की क़ुदरत का ऐसा ग़ैबी परदा (बरज़ख़) हाइल है कि न खारा पानी मीठे को ख़राब करता है और न मीठा खारे पर ग़ालिब आता है।
सूफ़ियाना इस्तिआरा: सूफ़िया-ए-किराम फ़रमाते हैं कि जैसे एक ही माँ से लड़का और लड़की, या एक ही बाप से मोमिन और काफ़िर पैदा हो जाते हैं और दोनों की सिफ़ात जुदा रहती हैं, वैसे ही क़ुदरत-ए-इलाही मुख़्तलिफ़ चीज़ों को बाहम रखते हुए भी अपनी हिकमत से मुम्ताज़ रखती है।
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