कुरान - 55:21 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

Transliteration: (Fabi ayyi aalaaa'i Rabbikumaa tukazzibaan)

तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 21

"तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?"


रब्बुल आलमीन की नेमतों का शुक्र

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि समुंदरों का क़ुदरती तौर पर अलग रहना और इंसानी मआश व ज़िन्दगी को संवारना अल्लाह तआला का अज़ीम एहसान है। जिन्नों और इंसानों दोनों को चाहिए कि वे अपने रब की बंदगी और शुक्रगुज़ारी में लगें।

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