Transliteration: (Fabi ayyi aalaaa'i Rabbikumaa tukazzibaan)
"तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि समुंदरों का क़ुदरती तौर पर अलग रहना और इंसानी मआश व ज़िन्दगी को संवारना अल्लाह तआला का अज़ीम एहसान है। जिन्नों और इंसानों दोनों को चाहिए कि वे अपने रब की बंदगी और शुक्रगुज़ारी में लगें।
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