कुरान - 55:23 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

Transliteration: (Fabi ayyi aalaaa'i Rabbikumaa tukazzibaan)

तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे [21]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 23

"तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे [21]?"


[21] सूरह अर-रहमान में 31 मर्तबा तकरार की हिकमत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह मुबारक आयत सूरह अर-रहमान में 31 मर्तबा दोहराई गई है:

  • नाशुक्रापन से बेदारी: इसका मक़सद जिन्न और इंसान को उनके ग़फ़लत और नाशुक्रापन से बेदार करना है ताकि वे हर नेमत के पीछे अपने मुनइम-ए-हक़ीक़ी (अल्लाह तआला) को पहचानें।
  • दिल में शुक्रगुज़ारी का इज़हार: जब बार-बार यह सवाल दोहराया जाता है तो मोमिन का दिल तड़प उठता है और वह पुकार उठता है: "ऐ हमारे परवरदिगार! हम तेरी किसी नेमत को नहीं झुठलाते, तमाम तारीफ़ें तेरे ही लिए हैं।"

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