Transliteration: (Yas'aluhoo man fissamaawaati walard; kulla yawmin huwa fee shaan)
"आसमानों और ज़मीन में जितने हैं, सब उसी से अपनी हाजतें माँगते हैं [26]। हर दिन उसकी एक नई शान (काम) है [27]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि फ़रिश्ते, इंसान, जिन्नात, चरिंद, परिंद सब अपनी-अपनी हाजतों—रिज़्क़, हयात, शिफ़ा, बख़्शिश—के लिए रब्बे क़य्यूम के मोहताज हैं। कोई भी मख़लूक़ अल्लाह की रहमत से बे-नियाज़ नहीं हो सकती।
यहूदियों का बातिल अक़ीदा था कि अल्लाह ने सनीचर (शनिवार) को आराम किया और अब वह कोई काम नहीं करता। क़ुरआन ने इस कुफ़्रिया अक़ीदे को रद्द फ़रमाया। अल्लाह हर आन नई शान में है—वह किसी को इज़्ज़त देता है, किसी को ज़िल्लत; किसी को ज़िन्दगी बख़्शता है, किसी को मौत देता है; दुआएँ क़बूल फ़रमाता है और कायनात की तदबीर फ़रमाता है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat