Transliteration: (Fabi ayyi aalaaa'i Rabbikumaa tukazzibaan.)
"तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हर लम्हा अल्लाह की रहमत और नवाज़िशों का बारिश की तरह बरसना बंदों पर एहसान-ए-अज़ीम है, जिसका शुकरिया अदा करना हर जानदार पर वाजिब है।
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