कुरान - 55:30 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

Transliteration: (Fabi ayyi aalaaa'i Rabbikumaa tukazzibaan.)

तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 30

"तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?"


हाजत-रवाई और शान-ए-रूहानियत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हर लम्हा अल्लाह की रहमत और नवाज़िशों का बारिश की तरह बरसना बंदों पर एहसान-ए-अज़ीम है, जिसका शुकरिया अदा करना हर जानदार पर वाजिब है।

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