कुरान - 55:32 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

Transliteration: (Fabi ayyi aalaaa'i Rabbikumaa tukazzibaan.)

तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे [29]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 32

"तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे [29]?"


[29] जिन्न व इंसान पर इलाही एहसानात

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हिसाब-किताब की ख़बर देना भी अल्लाह की नेमत है ताकि इंसान व जिन्न अभी से सँभल जाएँ और दोज़ख़ के अज़ाब से बचकर जन्नत की दायमी नेमतों के हक़दार बन सकें।

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