कुरान - 55:34 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

Transliteration: (Fabi ayyi aalaaa'i Rabbikumaa tukazzibaan.)

तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 34

"तो तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?"


रब्बुल आलमीन की क़ुदरत-ए-कामिला

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि बंदे को अपनी बेबसी और अल्लाह की क़ुदरत-ए-मुतलक़ा का एहसास होना चाहिए ताकि वह सरकशी छोड़कर इताअत की राह अपनाए।

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