कुरान - 55:46 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
وَلِمَنۡ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ جَنَّتَانِ

Transliteration: (Wa liman khaafa maqaama rabbihee jannataan)

और जो अपने रब के हुज़ूर खड़े होने से डरा [42], उसके लिए दो जन्नतें (बाग़) हैं [43]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 46

"और जो अपने रब के हुज़ूर खड़े होने से डरा [42], उसके लिए दो जन्नतें (बाग़) हैं [43]!"


[42] ख़ौफ़-ए-ख़ुदा और गुनाहों से परहेज़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जो मोमिन अल्लाह के हुज़ूर पेशी और हिसाब-किताब से डर कर दुनिया में गुनाहों और नफ़्सानी ख़्वाहिशात को छोड़ दे, उसके लिए यह अज़ीम बशारत है।

[43] दो जन्नतों का इनाम और उसकी हिकमत

उस मुत्तक़ी बंदे को दो जन्नतें मिलेंगी:

  • एक जन्नत नेक आमाल के बदले में और दूसरी अल्लाह के महज़ फ़ज़्ल व करम से।
  • या एक जन्नत ख़ौफ़-ए-इलाही के सबब और दूसरी इताअत व फ़रमाँबरदारी के सबब।
  • या एक जन्नत जिस्मानी आशाइशों के लिए और दूसरी रूहानी लज़्ज़तों व दीदार-ए-इलाही के लिए।

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