Transliteration: (Feehimaa min kulli faakihatin zawjaan)
"उन दोनों में हर फल की दो-दो क़िस्में हैं [46]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत के हर फल की दो क़िस्में होंगी—एक वह जो दुनिया में देखा और जाना-पहचाना था, और दूसरा वह अनोखा फल जो दुनिया में कभी किसी ने न देखा न सुना। या एक ख़ुश्क और एक तर, या एक मीठा और एक शीरीं। चूँकि बंदे ने फ़राइज़ और नवाफ़िल दोनों अदा किए थे, अल्लाह ने उसे हर फल का जोड़ा अता फ़रमाया।
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