Transliteration: (Feehimaa 'aynaani tajriyaan)
"उन दोनों में दो चश्मे बहते हैं [45]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि तफ़सीर रूहुल मआनी में है कि ये दो चश्मे 'तसनीम' और 'सलसबील' हैं जो कस्तूरी के पहाड़ों से फूटते हैं। चूँकि दुनिया में इन परहेज़गारों की दोनों आँखों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा में आँसू जारी होते थे, अल्लाह ने उसके बदले में जन्नत में दो रूहानी चश्मे उनके लिए जारी फ़रमा दिए।
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