कुरान - 55:54 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ فُرُشِۭ بَطَآئِنُهَا مِنۡ إِسۡتَبۡرَقٖۚ وَجَنَى ٱلۡجَنَّتَيۡنِ دَانٖ

Transliteration: (Muttaki'eena 'alaa furushim bataaa'inuhaa min istabraq; wajanal jannataini daan)

तख्तों पर तकिया लगाए होंगे [47] जिनके अस्तर गाढ़े रेशम (कमख़्वाब) के होंगे [48], और दोनों जन्नतों के फल इतने क़रीब झुके होंगे [49] कि आसानी से चुन लें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 54

"तख्तों पर तकिया लगाए होंगे [47] जिनके अस्तर गाढ़े रेशम (कमख़्वाब) के होंगे [48], और दोनों जन्नतों के फल इतने क़रीब झुके होंगे [49] कि आसानी से चुन लें।"


[47] जन्नत के आरामदेह तख़्त और मजलिसें

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में कोई मशक़्क़त या काम नहीं होगा, बल्कि सिर्फ़ आराम, लज़्ज़त और महफ़िलें होंगी। जैसे दुनिया में ज़िक्र-ओ-नाअत की मजलिसें होती हैं, वैसे ही जन्नत में रूहानी मजलिसें सजेंगी।

[48] कमख़्वाब (मोटे रेशम) के अस्तर और आला तरीन बिछौने

जब तख़्तों के गद्दों का अंदरूनी अस्तर मोटे रेशम और कमख़्वाब का है, तो ज़ाहिरी ऊपरी हिस्सा कितना हसीन और क़ीमती होगा इसका अंदाज़ा कोई इंसान नहीं लगा सकता!

[49] फलों का झुकना—खड़े, बैठे, लेटे हर हाल में तोड़ना

जन्नत के मेवे इतने क़रीब और झुके होंगे कि जन्नती चाहे खड़ा हो, बैठा हो, या तख़्त पर लेटा हुआ हो, दरख़्त की शाख़ ख़ुद उसके मुँह के क़रीब आ जाएगी और वह आसानी से फल तोड़ सकेगा।

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