Transliteration: (Muttaki'eena 'alaa furushim bataaa'inuhaa min istabraq; wajanal jannataini daan)
"तख्तों पर तकिया लगाए होंगे [47] जिनके अस्तर गाढ़े रेशम (कमख़्वाब) के होंगे [48], और दोनों जन्नतों के फल इतने क़रीब झुके होंगे [49] कि आसानी से चुन लें।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में कोई मशक़्क़त या काम नहीं होगा, बल्कि सिर्फ़ आराम, लज़्ज़त और महफ़िलें होंगी। जैसे दुनिया में ज़िक्र-ओ-नाअत की मजलिसें होती हैं, वैसे ही जन्नत में रूहानी मजलिसें सजेंगी।
जब तख़्तों के गद्दों का अंदरूनी अस्तर मोटे रेशम और कमख़्वाब का है, तो ज़ाहिरी ऊपरी हिस्सा कितना हसीन और क़ीमती होगा इसका अंदाज़ा कोई इंसान नहीं लगा सकता!
जन्नत के मेवे इतने क़रीब और झुके होंगे कि जन्नती चाहे खड़ा हो, बैठा हो, या तख़्त पर लेटा हुआ हो, दरख़्त की शाख़ ख़ुद उसके मुँह के क़रीब आ जाएगी और वह आसानी से फल तोड़ सकेगा।
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