कुरान - 55:56 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
فِيهِنَّ قَٰصِرَٰتُ ٱلطَّرۡفِ لَمۡ يَطۡمِثۡهُنَّ إِنسٞ قَبۡلَهُمۡ وَلَا جَآنّٞ

Transliteration: (Feehinna qaasiratut tarfi lam yatmishunna insun qablahum wa laa jaaann)

उनमें नीची निगाह वाली हूरें हैं [50] [51], जिन्होंने अपने शौहरों के सिवा किसी को आँख भरकर न देखा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 56

"उनमें नीची निगाह वाली हूरें हैं [50] [51], जिन्होंने अपने शौहरों के सिवा किसी को आँख भरकर न देखा।"


[50] जन्नती हूरों की तख़्लीक़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने अहले जन्नत के लिए ख़ास हूरें पैदा फ़रमाई हैं जो हुस्न-ओ-जमाल का शाहकार हैं।

[51] शर्म-ओ-हया और सिर्फ़ शौहर पर निगाह

वे इंतिहाई बाहया और शर्म व पाकीज़गी की मल्लिका होंगी। उनकी आँखें सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने शौहर की मोहब्बत में झुकी रहेंगी और वे अपने शौहर के अलावा कायनात में किसी की तरफ़ नज़र उठाकर भी न देखेंगी।

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