Transliteration: (Feehinna qaasiratut tarfi lam yatmishunna insun qablahum wa laa jaaann)
"उनमें नीची निगाह वाली हूरें हैं [50] [51], जिन्होंने अपने शौहरों के सिवा किसी को आँख भरकर न देखा।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने अहले जन्नत के लिए ख़ास हूरें पैदा फ़रमाई हैं जो हुस्न-ओ-जमाल का शाहकार हैं।
वे इंतिहाई बाहया और शर्म व पाकीज़गी की मल्लिका होंगी। उनकी आँखें सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने शौहर की मोहब्बत में झुकी रहेंगी और वे अपने शौहर के अलावा कायनात में किसी की तरफ़ नज़र उठाकर भी न देखेंगी।
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