Transliteration: (Ka annahunnal yaaqootu wal marjaan)
"गोया वे याक़ूत और मरजान हैं [53]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हदीस शरीफ़ में है कि जन्नती हूर के हुस्न और शफ़्फ़ाफ़ियत का यह आलम होगा कि उसकी पिंडली का गूदा सत्तर लिबासों के बाहर से ऐसे नज़र आएगा जैसे साफ़ शीशे की सुराही में से लाल शराब झलकती है। वे याक़ूत की तरह सुर्खी और मरजान की तरह पाकीज़ा व बे-दाग़ होंगी।
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