कुरान - 55:66 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
فِيهِمَا عَيۡنَانِ نَضَّاخَتَانِ

Transliteration: (Feehimaa 'aynaani nad daakhataan)

उन दोनों में दो चश्मे उबलते (छलकते) हुए हैं [57]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 66

"उन दोनों में दो चश्मे उबलते (छलकते) हुए हैं [57]!"


[57] मुश्क, अम्बर और काफ़ूर के महकते चश्मे

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इन दो जन्नतों में ऐसे चश्मे हैं जो मुसलसल उबलते और फ़व्वारे की तरह छलकते रहते हैं। इनका पानी मुश्क व अम्बर और काफ़ूर की ख़ुशबुओं से महकता हुआ और इंतिहाई शीरीं व मुसफ़्फ़ा होगा।

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