Transliteration: (Feehimaa 'aynaani nad daakhataan)
"उन दोनों में दो चश्मे उबलते (छलकते) हुए हैं [57]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इन दो जन्नतों में ऐसे चश्मे हैं जो मुसलसल उबलते और फ़व्वारे की तरह छलकते रहते हैं। इनका पानी मुश्क व अम्बर और काफ़ूर की ख़ुशबुओं से महकता हुआ और इंतिहाई शीरीं व मुसफ़्फ़ा होगा।
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