कुरान - 55:64 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
مُدۡهَآمَّتَانِ

Transliteration: (Mudhaaammataan)

निहायत गहरे हरे, कालेपन की हद तक शादाब [56]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 64

"निहायत गहरे हरे, कालेपन की हद तक शादाब [56]!"


[56] सब्ज़ी व शादाबी जो आँखों को ठंडक बख़्शे

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'मुदहाम-मतान' का मफ़हूम यह है कि इन जन्नतों के दरख़्त और पत्ते इतने घने, सब्ज़ और पानी से लबरेज़ हैं कि उनकी गहरी सब्ज़ी दूर से सियाह (काली) नज़र आती है। यह गहरा सब्ज़ रंग आँखों के लिए ठंडक, नज़र की तक़वियत और दिल के सुकून का ज़रिया है।

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