Transliteration: (Mudhaaammataan)
"निहायत गहरे हरे, कालेपन की हद तक शादाब [56]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'मुदहाम-मतान' का मफ़हूम यह है कि इन जन्नतों के दरख़्त और पत्ते इतने घने, सब्ज़ और पानी से लबरेज़ हैं कि उनकी गहरी सब्ज़ी दूर से सियाह (काली) नज़र आती है। यह गहरा सब्ज़ रंग आँखों के लिए ठंडक, नज़र की तक़वियत और दिल के सुकून का ज़रिया है।
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