मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 70 तफ़सीर
मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)
सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 70
"उनमें नेक सीरत, निहायत ख़ूबसूरत औरतें (हूरें) हैं [59]!"
[59] हुस्न-ए-सीरत को हुस्न-ए-सूरत पर मुक़द्दम रखना
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
सीरत की अहिमयत: अल्लाह तआला ने यहाँ 'ख़ैरात' (नेक सीरत) को 'हेसान' (ख़ूबसूरत) से पहले ज़िक्र फ़रमाया। इससे यह दरस मिलता है कि हुस्न-ए-सूरत से ज़्यादा हुस्न-ए-सीरत और पाकीज़ा अख़लाक़ की क़द्र होनी चाहिए। दुनिया में भी निकाह के लिए दीनदार और नेक सीरत औरत को तरजीह देनी चाहिए।
जन्नत की मख़्सूस हूरें: यहाँ 'फ़िहिन्ना' (उनमें) से मुराद जन्नत की हूरें हैं जो अपनी तख़्लीक़ ही से जन्नती हैं। दुनिया की नेक औरतें जो ईमान पर वफ़ात पाएँगी, वे अपने नेक आमाल के इनाम के तौर पर जन्नत में अपने शौहरों की मलिकाएँ बनेंगी और उनका हुस्न हूरों से भी फ़ाइक़ होगा।
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