Transliteration: (Hoorum maqsooraatun fil khiyaam)
"वे हूरें हैं जो ख़ैमों में परदानशीन हैं [60]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत के ख़ैमे मोतियों के बने हुए अज़ीम महल हैं जिनमें हूरें बाहया और परदानशीन रहेंगी, बे-परदा इधर-उधर नहीं फिरेंगी। इससे तीन बातें वाज़ेह होती हैं:
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