Transliteration: (Lam yatmis hunna insun qablahum wa laa jaaann)
"उनसे पहले उन्हें न किसी इंसान ने छुआ और न किसी जिन्न ने [61]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जैसे पहली दो जन्नतों की हूरें पाक और अछूती थीं, वैसे ही इन दो जन्नतों की हूरें भी कामिल पाकीज़ा हैं। यह आयत तकरार नहीं बल्कि दोनों जन्नतों की हूरों की बे-मिसाल इस्मत और तहारत की ताकीद है।
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