कुरान - 55:74 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
لَمۡ يَطۡمِثۡهُنَّ إِنسٞ قَبۡلَهُمۡ وَلَا جَآنّٞ

Transliteration: (Lam yatmis hunna insun qablahum wa laa jaaann)

उनसे पहले उन्हें न किसी इंसान ने छुआ और न किसी जिन्न ने [61]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 74

"उनसे पहले उन्हें न किसी इंसान ने छुआ और न किसी जिन्न ने [61]!"


[61] हूरों की बे-दाग़ इस्मत और पाकीज़गी की तौसीक़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जैसे पहली दो जन्नतों की हूरें पाक और अछूती थीं, वैसे ही इन दो जन्नतों की हूरें भी कामिल पाकीज़ा हैं। यह आयत तकरार नहीं बल्कि दोनों जन्नतों की हूरों की बे-मिसाल इस्मत और तहारत की ताकीद है।

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