कुरान - 55:76 सूरह अर-रहमान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ رَفۡرَفٍ خُضۡرٖ وَعَبۡقَرِيٍّ حِسَانٖ

Transliteration: (Muttaki'eena 'alaa rafrafin khudrinw wa 'abqariyyin hisaan)

हरी मसनदों और निहायत हसीन नादिर क़ालीनों पर तकिया लगाए होंगे [62]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रहमान आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रहमान तफ़सीर - आयत 76

"हरी मसनदों और निहायत हसीन नादिर क़ालीनों पर तकिया लगाए होंगे [62]!"


[62] 'अबक़री' यानी आला तरीन नफ़ीस बिछौने और क़ालीन

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'रफ़रफ़' से मुराद हरे मख़मली मसनद और गद्दे हैं, और 'अबक़री' से मुराद नादिर, हसीन और आला पाए के क़ालीन हैं। अहले अरब में 'अबक़र' उस जगह को कहा जाता था जहाँ निहायत नफ़ीस कपड़े बनते थे, फिर हर बेमिसाल और नायाब चीज़ को 'अबक़री' कहा जाने लगा। जन्नत के फर्श और मसनद अपनी नफ़ासत में लासानी होंगे।

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