कुरान - 37:102 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

102
فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ ٱلسَّعۡيَ قَالَ يَٰبُنَيَّ إِنِّيٓ أَرَىٰ فِي ٱلۡمَنَامِ أَنِّيٓ أَذۡبَحُكَ فَٱنظُرۡ مَاذَا تَرَىٰۚ قَالَ يَـٰٓأَبَتِ ٱفۡعَلۡ مَا تُؤۡمَرُۖ سَتَجِدُنِيٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّـٰبِرِينَ

Transliteration: (Falamma balagha ma'a hus sa'ya qaala yaa buniya inneee araa fil manaami anneee azbahuka fanzur maazaa taraa; qaala yaaa abatif 'al maa tu'maru satajidunee in shaaa'allaahu minas saabireen)

फिर जब वह (बेटा) उनके साथ दौड़-धूप करने की उम्र को पहुँच गया [103], तो फ़रमाया: "ऐ मेरे प्यारे बेटे! बेशक मैंने ख़्वाब में देखा है कि मैं तुझे ज़बह कर रहा हूँ [104], अब देख तेरी क्या राय है [105]?" उसने अर्ज़ की: "ऐ मेरे अब्बा जान! वही कीजिए जिसका आपको हुक्म दिया गया है [106]! अगर अल्लाह ने चाहा, तो आप मुझे सब्र करने वालों में पाएंगे [107]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 102 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 102

"फिर जब वह उनके साथ दौड़-धूप की उम्र को पहुँचा [103], तो फ़रमाया: 'ऐ बेटे! मैंने ख़्वाब में देखा कि तुझे ज़बह कर रहा हूँ [104], तेरी क्या राय है [105]?' उसने कहा: 'अब्बा जान! वही कीजिए जिसका हुक्म है [106], आप मुझे साबिर पाएंगे [107]!'"

[103] हज़रत इस्माईल का अहदे शबाब

जब हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) तेरह साल की उम्र को पहुंचे जहाँ वे वालिद माजिद के कामों में हाथ बंटाने लगे, तो अल्लाह की तरफ़ से इम्तिहान का वक़्त आया।

[104] अम्बिया का ख़्वाब वही-ए-इलाही है

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने लगातार तीन रातें ख़्वाब देखा कि वे अपने इकलौते बेटे को ज़बह कर रहे हैं। चूँकि अम्बिया का ख़्वाब शैतानी दख़ल से पाक और क़तई वही होता है, इसलिए यह अल्लाह का हुक्म था।

[105] बेटे से मशवरा और इम्तिहान

आपने बेटे से राय किसी शक की वजह से नहीं पूछी, बल्कि इसलिए पूछी ताकि बेटा भी अपनी रज़ा से इस अज़ीम सवाब और इम्तिहान में शरीक हो जाए।

[106] फ़रमांबरदारी की ला-ज़वाल मिसाल

हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) ने बिना किसी झिझक के फ़रमाया: ऐ अब्बा जान! आप हुक्मे इलाही को पूरा फ़रमाइए।

[107] रज़ा-ए-इलाही पर सब्र

उन्होंने अपनी जान की क़ुरबानी को इंशा-अल्लाह कह कर सब्र के साथ पेश किया, जो क़ियामत तक के लिए इताअत का आला तरीन नमूना बन गया।

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