कुरान - 37:22 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
۞ٱحۡشُرُواْ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ وَأَزۡوَٰجَهُمۡ وَمَا كَانُواْ يَعۡبُدُونَ

Transliteration: (Uhshurul lazeena zalamoo wa azwaajahum wa maa kaanoo ya'budoon)

(हुक्म होगा:) "घेरो उन ज़ालिमों को और उनके साथियों को [24], और जिन्हें वे पूजते थे [25], (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 22

"घेरो उन ज़ालिमों को और उनके साथियों को [24], और जिन्हें वे पूजते थे [25],"

[24] ज़ालिम और उनके हम-मसलक साथी

साथियों से मुराद उनके शयातीन भी हैं और उनके हम-फ़िक्र काफ़िर भी — यानी मुशरिक़ मुशरिक़ों के साथ, और दह्रिए दह्रियों के साथ ज़ंजीरों में जकड़ कर एक साथ हांक कर लाए जाएंगे।

[25] बातिल माबूद और बुत जहन्नम का ईंधन

इससे मुराद पत्थर, दरख़्त, सूरज और चांद जैसे बे-जान माबूद हैं। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) और हज़रत उज़ैर (अलैहिस्सलाम) इसमें शामिल नहीं हैं क्योंकि अरबी में लफ़्ज़े "मा" (बे-जान चीज़ों) के लिए आया है। इन बुतों को जहन्नम में इसलिए डाला जाएगा ताकि वे मुशरिक़ों के अज़ाब और हसरत का ज़रिया बनें।

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