Transliteration: (Wa qifoohum innahum mas'ooloon)
"और उन्हें रोको! बेशक उनसे सवाल किया जाना है [26]!"
दैलमी ने हज़रत अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत की है कि इस मक़ाम पर बंदों से हज़रत अली और अहले बैत की मोहब्बत के बारे में सवाल होगा, क्योंकि हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: "मैं तुमसे अपनी क़राबतदारी की मोहब्बत के सिवा कोई उजरत नहीं मांगता" (सवाइक़-ए-मुहर्रिक़ा)।
इसके अलावा मुशरिक़ीन से उनके शिर्क, आमाल और बातिल अक़ायद के बारे में भी सख़्त बाज़पुर्स होगी।
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