कुरान - 37:28 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
قَالُوٓاْ إِنَّكُمۡ كُنتُمۡ تَأۡتُونَنَا عَنِ ٱلۡيَمِينِ

Transliteration: (Qaalooo innakum kuntum taatoonanaa 'anil yameen)

(कमज़ोर लोग) कहेंगे [28]: "बेशक तुम ही हमारे पास ज़ोर-ज़बरदस्ती से (ताक़त और दबदबे से) आते थे [29]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 28

"वे कहेंगे [28]: 'बेशक तुम ही हमारे पास ज़ोर-ज़बरदस्ती से आते थे [29]!'"

[28] गुमराह करने वाले सरदारों और पैरोकारों का झगड़ा

यह गुफ़्तगू काफ़िर सरदारों और उनके मातहत काफ़िरों के दरमियान होगी, न कि मोमिनों और अंबिया-औलिया के दरमियान। अंबिया और उनके मोमिन ग़ुलाम तो जहन्नम के ऊपर से बिजली की तरह गुज़र जाएंगे।

[29] ताक़त और दौलत के बल पर कुफ़्र पर मजबूर करना

कमज़ोर लोग कहेंगे कि तुम अपनी दुनियावी ताक़त, हुकूमत और माल के ज़रिए हमें सीधे रास्ते से रोकते और कुफ़्र पर मजबूर करते थे। इससे यह मसला भी वाज़ेह हुआ कि ज़बरदस्ती में भी कुफ़्र को दिल से अपनाना जायज़ नहीं, बल्कि इंसान अपनी अक़्ल और ईमान का ख़ुद ज़िम्मेदार है।

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