कुरान - 37:30 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيۡكُم مِّن سُلۡطَٰنِۭۖ بَلۡ كُنتُمۡ قَوۡمٗا طَٰغِينَ

Transliteration: (Wa maa kaana lanaa 'alaikum min sultaanim bal kuntum qawman taagheen)

"और हमारा तुम पर कोई ज़ोर न था, बल्कि तुम ख़ुद ही सरकश (हद से बढ़ने वाले) लोग थे [31]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 30

"और हमारा तुम पर कोई ज़ोर न था, बल्कि तुम ख़ुद ही सरकश लोग थे [31]!"

[31] ज़बरदस्ती का इंकार और अपनी अपनी ज़िम्मेदारी

सरदार कहेंगे कि हमने तुम पर कोई जादू या जबर नहीं किया था, न तुम्हारे हाथ-पांव बांधे थे। तुम अपनी ही ख़्वाहिशात के ग़ुलाम और सरकश थे। क़ियामत के दिन हर इंसान अपने आमाल और अक़ायद का ख़ुद ज़िम्मेदार होगा।

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