Transliteration: ('Alaa sururim mutaqaa bileen)
"तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे [45];"
अहले जन्नत तख़्तों पर हल्क़ा बना कर आमने-सामने बैठेंगे, किसी की पुश्त (पीठ) किसी दूसरे की तरफ़ न होगी। यह उनके बाहमी प्यार, उन्सियत और दिल के साफ़ होने की दलील है। दुनिया में ज़िक्र की मजालिस जन्नत की मजालिस से मुशाबहत रखती हैं।
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